आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये Awargi Mein Had Se Guzar Jana Chahiye Lyrics

आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये Awargi Mein Had Se Guzar Jana Chahiye Lyrics Lyrics

“Awargi Mein Had Se Guzar Jana Chahiye” Song Details:

Album/Label: Awargi Mein Had Se
Singer(s): Munni Begum
Lyricist(s): Hassan Abbas Raza
Composer(s): Munni Begum
Music Director(s): Munni Begum
Genre(s): Ghazal
Music Label: © Times Music
Release on: 15th April, 2013

आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये

मुझसे बिछड़ कर इन दिनों किस रंग में है वो
मुझसे बिछड़ कर इन दिनों किस रंग में है वो
मुझसे बिछड़ कर इन दिनों किस रंग में है वो
ये देख ने रकीब के घर जाना चाहिये
ये देख ने रकीब के घर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये

उस बूत से इश्क़ कीजिये लेकिन कुछ इस तरहा
उस बूत से इश्क़ कीजिये लेकिन कुछ इस तरहा
उस बूत से इश्क़ कीजिये लेकिन कुछ इस तरहा
पूछे कोई तो साफ़ मुकर जाना चाहिये
पूछे कोई तो साफ़ मुकर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये

अफ़सोस अपने घर का पता हमसे खो गया
अफ़सोस अपने घर का पता हमसे खो गया
अफ़सोस अपने घर का पता हमसे खो गया
अब सोचना ये है के किधर जाना चाहिये
अब सोचना ये है के किधर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये


बैठे है हरफासिल पे कुछ लोग ताक में
बैठे है हरफासिल पे कुछ लोग ताक में
बैठे है हरफासिल पे कुछ लोग ताक में
अच्छा है थोड़ी देर से घर जाना चाहिये
अच्छा है थोड़ी देर से घर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये

रब्बे विशाल वस्ल का मौसम भी आ गया
रब्बे विशाल वस्ल का मौसम भी आ गया
रब्बे विशाल वस्ल का मौसम भी आ गया
अब तो मेरा नसीब संवर जाना चाहिये
अब तो मेरा नसीब संवर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये

नादान जवानी का ज़माना गुज़र गया
नादान जवानी का ज़माना गुज़र गया
नादान जवानी का ज़माना गुज़र गया
अब आ गया बुढ़ापा सुधर जाना चाहिये
अब आ गया बुढ़ापा सुधर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये

बैठे रहोगे दस्त में कब तक हसन रज़ा
बैठे रहोगे दस्त में कब तक हसन रज़ा
बैठे रहोगे दस्त में कब तक हसन रज़ा
जीना अगर नहीं है तो मर जाना चाहिये
जीना अगर नहीं है तो मर जाना चाहिये
लेकिन कभी कभार
लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये
आवारगी में हद से गुज़र जाना चाहिये.

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