“Shri Tulsi Chalisa” Song Details:
| Album/Label: | Chalisa Sangrah |
| Singer(s): | Rakesh Kala |
| Lyricist(s): | Traditional |
| Music Director(s): | Rakesh Sharma |
| Genre(s): | Chalisa |
| Music Label: | © Brijwani Cassettes |
| Release on: | 14th January, 2013 |
दोहा:
श्री तुलसी महारानी करू विनय सिरनाय
जो मम हो संकट विकट दीजै मात नशाय
चौपाई:
नमो नमो तुलसी महारानी महिमा अमित न जाय बखानी
दियो विष्णु तुमको सनमाना जग में छायों सुयश महाना
विष्णुप्रिया जय जयति भवानी तिहूं लोक की हो सुखखानी
भगवत पूजा करे जो कोई बिना तुम्हारे सफल न होई
जिन घर तव नहीं होय निवासा उस पर करहिं विष्णु नहीं बासा
करें सदा जो तव नित सुमिरन तेहीके कारज होय सब पूरन
कार्तिक मास महात्म तुम्हारा ताको जानत सब संसारा
तव पूजन जो करें कुँवारी पावै सुंदर वर सुकमारी
कर जो पूजा नितप्रति नारी सुख संपति से होय सुखारी
वृद्धा नारी करें जो पूजन मिले भक्ति होवै पुलकित मन
श्रद्धा से पूजे जो कोई भवनिधि से तर जावै सोई
कथा भागवत यज्ञ करावे तुम बिन नहीं सफलता पावै
छायो तब प्रताप जगभारी ध्यावत तुमहिं सफल चितधारी
तुम ही मात यंत्रन तंत्रन में सफल काज सिधि होवै क्षण में
औषधि रूप आप हो माता सब जग में तव यश विख्याता
देव रिषि मुनि और तपधारी करत सदा तव जय जयकारी
वेद पुराणन तव यश गाया महिमा अगम पार नहीं पाया
नमो नमो जै जै सुखकरनी नमो नमो जै दुखनिवारनि
नमो नमो सुखसंपति देनी नमो नमो अघ काटन छेनी
नमो नमो भकतन दुख हरनी नमो नमो दुष्टन मद छेनी
नमो नमो भव पार उतारनि नमो नमो परलोक सुधारनि
नमो नमो निज भक्त उबारनि नमो नमो जन काज संवारनि
नमो नमो जै कुमति नाशवनि नमो नमो सब सुख उपजावनि
जयति जयति जै तुलसी माई ध्याऊँ तुमको शीश नवाई
निजजन जानी मोही अपनाओ बिगड़े कारज आप बनाओ
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी पूरण आशा करहु हमारी
चरण शरण कर जोरी मनाऊँ निशदिन तेरे ही गुण गाउँ
करहु मात अब मोपर दाया निर्मल होय सकल मम काया
मांगु मात यह वर दीजै सकल मनोरथ पूर्ण कीजै
जानु नाही कुछ नेम अचारा छमहू मात अपराध हमारा
बारह मास करै जो पूजा ता सम जग में और न दूजा
प्रथमही गंगाजल मंगवावे फिर सुंदर स्नान करावे
चन्दन अक्षत पुष्प चढ़ावे धूप दीप नैवेध लगावे
करे आचमन गंगा जल से ध्यान करे हृदय निर्मल से
पाठ करे फिर चालीसा की अस्तुति करे मात तुलसा की
यह विधि पूजा करे हमेशा ताके तन नहीं रहे कलेशा
करे मास कार्तिक का साधन सो नित पवित्र सिध हुयी जाहिं
है यह कथा महा सुखदाई पढै सुने भव तर जाई
दोहा:
यह श्री तुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय.


