तुम पश्छिम हो हम पूरब हैं Tum Paschim Ho Hum Poorab Hain Lyrics

तुम पश्छिम हो हम पूरब हैं Tum Paschim Ho Hum Poorab Hain Lyrics Lyrics

“Tum Paschim Ho Hum Poorab Hain” Song Details:

Movie: Navrang
Singer(s): Ramchandra Narhar Chitalkar (C. Ramchandra)
Lyricist(s): Bharat Vyas
Composer(s): Ramchandra Narhar Chitalkar (C. Ramchandra)
Music Director(s): Ramchandra Narhar Chitalkar (C. Ramchandra)
Genre(s): Playful
Director(s): Rajaram Vankudre Shantaram
Music Label: © Saregama
Starring: Mahipal, Sandhya, Ulhas, Jeetendra
Release on: 1st June, 1959

तुम पश्छिम हो हम पूरब हैं
दोनों का मेल न मिलता है
उगता है जो सूरज पूरब में
अरे उगता है जो सूरज पूरब में
वो पश्छिम में जा दहलता है
वो पश्छिम में जा दहलता है
वो पश्छिम में जा दहलता है

लिरिक्सबोगी.कॉम

तुम पश्छिम हो हम पूरब है
कहता है कि पूरब पश्चिम के
मिलान से इतिहास के
पैन सुनहरे हो जाएंगे
धेन लेट हिम कंटिन्यू
दोनों का मेल न मिलता है
दोनों का मेल न मिलता है

पूरब की पवन मंगलकारी
मंगल संदेश सुनाती है
पश्छिम की हवा में है ज़हर भरा
जो घर घर आग लगाती है
धरती धरती में है फ़र्क़ बड़ा
माटी माटी में है अंतर
इस माटी में जन्मे साधू
इस माटी में जन्मे साधू
उस धूल में जन्मे बिकते हैं
उस धूल में जन्मे बिकते हैं
उस धूल में जन्मे बिकते हैं
तुम पश्छिम हो हम पूरब है
दोनों का मेल न मिलता है
दोनों का मेल न मिलता है

तुम बाँध रहे इस दुनिया को
तुम बाँध रहे इस दुनिया को
कानूनों की ज़ंजीरों से
हम जोड़ रहे दिल से दिल को
बास प्यार की चण्ड लकीरों से
दुनिया की हुकूमत चाहो तुम
तोपों से बोम्बों से गोली से
हमने तो दिलों पे है राज़ किया
हमने तो दिलों पे है राज़ किया
अपनी गीता की बोली से
अपनी गीता की बोली से
अपनी गीता की बोली से
तुम पश्छिम हो हम पूरब है
दोनों का मेल न मिलता है
दोनों का मेल न मिलता है

तुम ढूंढ रहे हो ओ ओ
तुम ढूंढ रहे हो नारी के नैनों में
युएवं का नर्तन
तुम ढूंढ रहे हो नारी के नैनो में
युएवं का नर्तन
हम ढून्ढ रहे हैं नारी के
ह्रदय में ममता का बचपन
हम ढून्ढ रहे हैं नारी के
ह्रदय में ममता का बचपन
तुम झूम रहे
तुम झूम रहे मदिरा पी के
रस लेते हो मांस की बोटी में
हम पेट भरें दो रोटी में
हम पेट भरें दो रोटी में
और खुश हैं एक लंगोटी में
और खुश हैं एक लंगोटी में
और खुश है एक लंगोटी में
तुम पश्छिम हो हम पूरब हैं
दोनों का मेल न मिलता है
दोनों का मेल न मिलता है


तुममे हम’में इक फ़र्क़ा बड़ा
जो लाख मिलाने से मिल न सके
पूरब का हिमालय
पश्छिम की आंधी के
थपेड़ों से हिल न सके
आंधी के थपेड़ों से हिल न सके
पश्छिम में सूरज
कभी ऊग न सके ओ
पूरब में सूरज
कभी ढल न सके वो
पूरब में सूरज
कभी ढल न सके
आ आए तुम जी न सको
तुम जी न सको
हम मर न सके
विधि का यह विधान बदल न सके
होऊ तुम भक्षक है
अरे तुम भक्षक है
हम रक्षक हैं
ये सान्ग कभी न फलता है
ये सान्ग कभी न फलता है
ये सान्ग कभी न फलता है
ये सान्ग कभी न फलता है
तुम पश्छिम हो हम पूरब हैं
दोनों का मेल न मिलता है
दोनों का मेल न मिलता है.

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