सरस्वती चालीसा Saraswati Chalisa Lyrics

सरस्वती चालीसा Saraswati Chalisa Lyrics Lyrics

“Saraswati Chalisa” Song Details:

Album/Label: Bhajan Aarti Chalisa
Singer(s): Dinesh Mali
Lyricist(s): Traditional
Music Director(s): Dinesh Mali
Genre(s): Chalisa
Music Label: © PRG Music, Film Studio
Release on: 5th January, 2017

दोहा :

जनक जननि पदमरज निज मस्तक पर धरि
बन्दौं मातु सरस्वती बुद्धि बल दे दातारि
पूर्ण जगत में व्याप्त तव महिमा अमित अनंत
दुष्टजनो के पाप को मातु तु अब हन्त

चौपाई :

लिरिक्सबोगी.कॉम

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी जय सर्वज्ञ अमर अविनासी
जय जय जय वीणाकर धारी करती सदा सुहंस सवारी
जय जय हो तेरी मात शारदे

रूप चतुर्भुजधारी माता सकल विश्व अन्दर विख्याता
जग में पाप बुद्धि जब होती तबहि धर्म की फीकी ज्योती
जय जय हो तेरी मात शारदे


तबहि मातु का निज अवतारा पाप हीन करती मह तारी
बाल्मीकि जी थे हत्यारा तव प्रसाद जाने संसारा
जय जय हो तेरी मात शारदे

रामचरित जो रचे बनाई आदि कवी की पदवी पाई
कालिदास जो भये विख्याता तेरी कृपा दृष्टि से माता
जय जय हो तेरी मात शारदे

तुलसी सूर आदि विद्धाना भये और जो ज्ञानी नाना
तिन हन और रहयो अवलम्बा केवल कृपा आपकी अम्बा
जय जय हो तेरी मात शारदे

करहु कृपा सुमात भवानी दुखित दीन निज दासहि जानी
पुत्र करै अपराध बहूता तेहि न धरइ चित माता
जय जय हो तेरी मात शारदे

राखु लाज जननी अब मेरी विनय करूं बहु भांति घनेरी
मैं अनाथ तेरी अवलंबा कृपा करउ जय जय जगदंबा
जय जय हो तेरी मात शारदे

मधु कैटभ जो अति बलवाना बाहुयुद्ध विष्णू से ठाना
समर हजार पांच में घेरा फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा

मातु सहाय भई तेहि काला बुद्धि विपरीत करी खलहाला
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी पुरवहु मातु मनोरथ मेरी
जय जय हो तेरी मात शारदे

चंड मुण्ड जो थे विख्याता क्षण महुं संहारे उन माता
रक्तबीज से समरथ पापी सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी
जय जय हो तेरी मात शारदे

काटेउ सिर जिम कदली खम्भा बार बार बिनवउं जगदंबा
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा क्षण में बधे ताहि तू अम्बा
जय जय हो तेरी मात शारदे

भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई रामचंद्र बनवास कराई
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा
जय जय हो तेरी मात शारदे

को समरथ तव यश गुन गाना निगम अनादि अनंत बखाना
विष्णु रूद्र जस कहिं न मारी जिनकी हो तुम रक्षाकारी
जय जय हो तेरी मात शारदे

रक्त दन्तिका और शताक्षी नाम अपार है दानव भक्षी
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा
जय जय हो तेरी मात शारदे

दुर्ग आदि हरनी तू माता कृपा करहु जब जब सुखदाता
नृप कोपित को मारन चाहै कानन में घेरे मृग नाहै
जय जय हो तेरी मात शारदे

सागर मध्य पोत के भंजे अति तूफान नहिं कोऊ संगे
भूत प्रेत बाधा या दुःख में हो दरिद्र अथवा संकट में
जय जय हो तेरी मात शारदे

नाम जपे मंगल सब होई संशय इसमें करइ न कोई
पुत्रहीन आतुर को भाई सबै छांड़ि पूजें एहि माई
जय जय हो तेरी मात शारदे

करै पाठ नित यह चालीसा होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा
धूपादिक नैवेध्य चढावै संकट रहित अवश्य हो जावै
जय जय हो तेरी मात शारदे

भक्ति मातु की करै हमेशा निकट न आवै ताहि कलेशा
बंदी पाठ करें शत बारा बंदी पाश दूर हो सारा
जय जय हो तेरी मात शारदे

रामसागर हेतु मांगी भवानी कीजे क्रिपा दास निज जानी
रामसागर हेतु मांगी भवानी कीजे क्रिपा दास निज जानी
जय जय हो तेरी मात शारदे

रामसागर हेतु मांगी भवानी कीजे क्रिपा दास निज जानी
रामसागर हेतु मांगी भवानी कीजे क्रिपा दास निज जानी
जय जय हो तेरी मात शारदे
जय जय हो तेरी मात शारदे
जय जय हो तेरी मात शारदे

दोहा :

मा तू सूर्य कान्ति तव अंधकार मम रूप
डूबन से रक्षा करहु परूं न मैं भव-कूप
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि सुनहु सरस्वति मा
रामसागर अधम को आश्रय तुम ही देत.

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